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प्राचीन काल से ही भारत विविधताओं का देश रहा है । यहाँ पर हर 50 किलोमीटर जाने पर आपको व्यक्तियों के रहन सहन में बदलाव नज़र आने लगता है । ऐसे ही बदलाव का एक उदाहरण है गाँव घोड़ो पिपली। जिसके बारे में हमेशा से विद्वानों में मतभेद रहा है । आईये आज हम आपको इसके बारे कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयत्न करेंगे ( हमारे द्वारा दी गयी जानकारी कई सालों से चले आ रहे अध्य्यन का ही हिस्सा है )

भारत की उत्तर दिशा में स्थित हरियाणा राज्य के यमुनानगर जिला का एक छोटा सा गाँव है घोड़ो पिपली । यह गाँव उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की बॉर्डर से सटा हुआ है ।
वैसे तो गांव घोड़ो पिपली का इतियास कई सौ साल पुराना माना जाता है । लेकिन लगभग 300 साल पहले जब इस गाँव के चारो तरफ घने जंगल हुआ करते थे उस समय दूर दूर से गायो को चराने के लिये लोग इन जगलो में आते थे । ये घटना भी उसी समय की है जब कुछ हिन्दू समाज के लोग अपनी गायो को लेकर इन जगलो में चराने के लिये आये हुए थे । उस समय आधुनिक उपकरणों का अभाव होने के कारण वे सभी कुछ समय के लिये इन जगलो में रुक जाते थे तथा गाय का दूध व अन्य फल खाकर गुजारा करते थे । हर वर्ष वह सभी इसी तरह गायो को लेकर आते तथा मौसम के अनुसार चले जाते थे । वे सभी सर्दी का मौसम के बाद आते और गर्मी के बाद बरसात के मौसम में वापिस अपने घरों की और लौट जाते थे ।

उस समय इस गांव में मुस्लिम समाज के लोग रहते थे । वे गायों को चराने आये हुये हिन्दू समाज के लोगो को परेशान करते थे ।

धीरे-धीरे समय बीतता गया । बताया जाता है कि यहाँ पर बड़े-बड़े पीपल के पेड़ हुआ करते थे । एकबार इन पीपल के पेड़ में बने हुई जगह में सिद्ध बाबा मेले नाथ जी रहते थे जो ये सब देख रहे थे । हिन्दू समाज के लोग मुस्लिमो से परेशान होकर बाबा जी के पास गये तथा उनसे मदद मांगी ।
बाबा जी ने उनको कहा कि तुम सब मिलकर यहां पर रहने लग जाओ । मैं तुम्हारे साथ हूँ ये लोग तुम्हारा कुछ नही बिगाड़ पायेंगे । अगर इन्होंने तुम लोगो को कुछ भी परेशान करने की कोशिस की तो वो पल इन सबका इस गाँव मे आखिरी पल होगा । ये सब कहकर बाबाजी अंतरध्यान हो गये । ये सब सुनकर सभी लोग आश्चर्य में पड़ गये । परन्तु बाबा जी कही हुई बात को मान कर , उन्होंने ऐसा ही करने का फैसला किया ।

हिन्दू समाज के लोग अपनी गायो के साथ गांव में बसने का निर्णय लेकर वहां रहना शुरू कर दिया । मुस्लिम समाज के लोगो को यह बात ठीक नही लगी और उन्होंने हिन्दू समाज के लोगो को परेशान करने की कोशिश की , तभी अचानक मुस्लिम समाज के लोग चिल्लाने लगे बचाओ बचाओ….. किसी को भी समझ मे नही आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है चिमटे की आवाज सुनाई दे रही थी टन टन टन…….
मुस्लिम समाज के लोग वहाँ से भाग खड़े हुये । उनकी जैसे कोई पिटाई कर रहा हो । ये चमत्कार देख हिन्दू समाज के लोगो को सिद्ध बाबा मेले नाथ जी की कही हुई बात याद आ गयी और वो सब समझ गए कि ये सब बाबा जी का ही चमत्कार है ।

इस प्रकार उस गांव में हिन्दू समाज के लोग अपने परिवार के साथ रहने लगे धीरे धीरे समय बीतता चला गया बाबा जी पर उनका विश्वास बढ़ता चला गया । तभी से इस गांव का नाम बड़े बड़े पीपल और ग्रामवासियो के द्वारा रखे जा रहे घोडे एवं घोड़ियों की वजह से घोड़ो पिपली पड़ गया । आज भी इस गांव सिद्ध बाबा मेले नाथ जी का भव्य मंदिर बना हुआ है जहां पर आस पड़ोस के गांव से भी लोग दर्शन के लिये आते है ।

सभी गांव वाले जब भी कोई भैस या गाय बच्चा देती है तो सबसे पहले ये उस गाय या भैस का दूध मन्दिर में बाबा जी को समर्पित कर उनसे आशीर्वाद लेते है की उनके घर परिवार में दूध घी की कभी कमी न हो ।

चारो तरफ से यमुना नदी से घिरा ये गाँव आज के समय मे काफी तरक्की कर चुका है ।
यहां पर 3 पेट्रोल पंप है जो कि हरियाणा के किसी भी पेट्रोल पंप से ज्यादा बिक्री करने का रिकॉर्ड बना चुके है । यहां पर गन्ना ,गेंहू ,धान ,दाल व अन्य बहुत प्रकार की उन्नत किस्म की खेतीबाड़ी यहाँ के किसानों द्वारा की जा रही है । दूसरी जगहों की तुलना में यहां पर पानी के स्रोत्र काफी अच्छे है जिससे खेतो के लिये पानी की उपलब्धता आसानी से हो जाती है ।

इस गांव में आज से 15-20 साल पहले लगभग ज्यादातर घर कच्चे हुआ करते थे परंतु आज सभी ग्रामवासियो ने अपनी मेहनत और लगन की वजह से पूरे गांव में एक भी कच्चा घर या मकान नही रह गया है । यहां पर हर घर मे आपको ट्रैक्टर , ट्रॉली , नई तकनीक वाले फ़र्टिलाइज़र व अन्य महत्वपूर्ण उपकरण मिलेंगे जो खेती करने में सहायक है।

गाँव घोड़ो पिपली में आस पास के क्षेत्र को देखते हुए किसानों की स्तिथि काफी अच्छी है ,सभी बडे बडे जमीदार में गिने जाते है । इस गांव के सरपंच सुमित कुमार की आयु 27 साल है जिससे पता चलता है कि ये गाँव अब कितना बदल चुका है यहाँ के नवयुवक प्रगति की ओर बढ़ रहे है ।
इस गांव में आज भी पुरानी पंरपरा को पूरी अहमियत दी जाती है जितनी कि पहले दी जातो थी । जैसे शादी के तौर तरीके हो या फिर कोई अन्य त्योहार हो । आज भी यहां के लोग मिल जुल सभी त्यौहार मनाते है । सभी एकजुट होकर ,एक दूसरे की मदद करते है। भारत मे ऐसे बहुत कम गांव रह गए जहां पर आपस मे ऐसा देखने को मिलता है । इस गांव में आज भी कोई मुस्लमान नही रहता है ।

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